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अनियमित जीवनशैली है एसि‍डिटी की मुख्‍य वजह

अनियमित जीवनशैली है एसि‍डिटी की मुख्‍य वजह

July 11, 2019

वर्तमान समय में जीवनशैली में लोग शारीरिक गतिविधियां बहुत कम करते हैं और व्‍यायाम के लिए तो जैसे उनके पास समय ही नहीं है। ऐसी स्थिति में कई बीमारियां फैल रही हैं और अब कम उम्र में ही बच्‍चे ऐसी बीमारियों एवं स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का शिकार होने लगे हैं जो कभी बूढ़ों को हुआ करती थीं। 


अनियमित जीवनशैली की वजह से एसिडिटी होना भी आम बात हो गई है। असंतुलित आहार और खानपान संबंधित गलत आदतों की वजह से एसिडिटी परेशान करने लगी है। कुछ दुर्लभ मामलों में एसिडिटी खतरनाक रूप भी धारण कर सकती है और इसकी वजह से व्‍यक्‍ति की जान तक जा सकती है। 


आज इस लेख के ज़रिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह अनियमित जीवनशैली की वजह से एसिडिटी की समस्‍या बढ़ रही है। 


ए‍सिडिटी क्‍यों होती है? 


भोजन करने के बाद पाचन के दौरान उसमें कई तरह के पाचक एसिड मिल जाते हैं। इन एसिड के मिलने पर पेट में वायु पैदा होती है जो पेट में गैस  के रूप में बैठ जाती है। सामान्‍य तौर पर ऐसा अपच के कारण होता है। 


एसिडिटी में पेट दर्द, सीने में जलन, कुछ खाने का मन ना करना, डकार आना और पेट में भारीपन महसूस होता है। 


एसिडिटी और जीवनशैली का संबंध 


हम सभी जानते हैं कि आज जिस जीवनशैली को हमने अपनाया है वो हमें कई बीमारियों का शिकार बना रही है। इसकी वजह से कई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी परेशानियां हो रही हैं जिनमें एसिडिटी भी शामिल है। 
अगर जीवनशैली में कोई खराबी हो या व्‍यायाम की कमी हो तो एसिडिटी की शिकायत होती रहती है। एक अध्‍ययन में भी य‍ह बात सामने आई है कि लगातार 10 घंटे तक बैठकर काम करने से आपकी जिंदगी के 6 से 7 साल कम हो सकते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप काम के बीच में ब्रेक लेकर थोड़ा टहल लें। 


अकसर हम ऑफिस में लंच के दौरान खाना खाकर बैठ जाते हैं और इस स्थिति में खाना ठीक तरह से पच नहीं पाता है। खाना ना पचने पर एसिडिटी जन्‍म लेती है।


एसिडिटी दूर करने के लिए जीवनशैली में बदलाव 


डाइट में हैल्‍दी चीजों और दिनचर्या में व्‍यायाम को अपनाकर एसिडिटी से राहत मिल सकती है लेकिन इसके अलावा जीवनशैली से संबंधित कुछ अच्‍छी आदतें भी आपको इस समस्‍या से बचा सकती हैं। 
इसमें कम खाना, सही कपड़े पहनना और अपने शरीर की जरूरतों को सुनना शामिल है। 


शराब और निकोटीन से दूर रहें 


एक सिगरेट या एक गिलास शराब पीने से शरीर रिलैक्‍स अवस्‍था में चला जाता है। ये एक वाल्‍व बनाता है जो भोजन नली और पेट को अलग कर देता है। अब एसिड पेट में आ सकता है और रिफलक्‍स का कारण बन सकता है। आपको सिगरेट या शराब पीने पर उल्‍टी और पेट दर्द महसूस हो सकता है। 


मसालेदार खाना 


जिस तरह मिर्च खाने पर जीभ पर जलन होती है, उसकी प्रकार मसालेदार खाने से पेट में भी जलन पैदा होती है। इस जलन से पेट में एसिड रिफलक्‍स के लक्षण पैदा हो सकते हैं। ये दर्द और असहजता का कारण बनता है। इसलिए ज्‍यादा मिर्च वाला खाना, वसाबी पेस्‍ट, लाल मिर्च और चिली पाउडर आदि खाने से बचें।


आदतों में बदलाव


क्‍या खा रहे हैं, इसके अलावा कब और कैसे खाना है ये भी ध्‍यान रखना जरूरी है। थोड़ी-थोड़ी देर में कम-कम खाएं। ज्‍यादा खाने से पेट पर दबाव पड़ेगा। जल्‍दबाजी में ना खाएं। 


लंच या नाश्‍ता करना ना भूलें। इसकी वजह से दिनभर में आप ओवरईटिंग कर सकते हैं। आधी रात को स्‍नैक्‍स ना खाएं क्‍योंकि इससे सीने में जलन हो सकती है। सोने से पहले कुछ खाने पर आपको आधी रात को पेट में दर्द हो सकता है। सही मुद्रा में बैठकर खाएं और खाना खाने के दो से तीन घंटे बाद तक लेटें नहीं।


चॉकलेट या खट्टे फल ना खाएं 


पेट खराब होने पर चॉकलेट ना खाएं। चॉकलेट में कोको और कैफीन होता है जिससे एसिड रिफलक्‍स के लक्षण बढ़ सकते हैं। 


खट्टे फल जैसे चकोतरा और संतरा बहुत ज्‍यादा अम्‍लीय होते हैं। इनकी वजह से एसिड रिफलक्‍स हो सकता है।


वजन कम करें 


आपका वजन जितना ज्‍यादा होगा, उतना ही ज्‍यादा आपके अंदरूनी अंगों पर दबाव पड़ेगा। पेट के साथ भी ऐसा ही होता है। लंबे समय तक मोटापा बने रहने पर भोजन नली और पेट के बीच का वाल्‍व ढीला हो सकता है। इस स्थिति में एसिड यहां आकर रूक सकता है और सीने में जलन पैदा कर सकता है।


ढीले कपड़े पहनें 


नींद के दौरान टाइट कपड़े पहनने से पेट पर दबाव पड़ता है और एसिड ज्‍यादा बढ़ता है। बैल्‍ट, टाइट जींस आदि पहनने से भी ऐसा ही होता है। ढीले कपड़े पहनें जिससे पेट पर दबाव ना पड़े। 
जीवनशैली में उपरोक्‍त बदलाव करके भी एसिडिटी से बचा जा सकता है। इसके अलावा अगर आपको बहुत ज्‍यादा एसिडिटी हो रही है तो Gas-o-fast का सेवन करें।

हमेशा अपने पास Gas-o-fast रखें ताकि एसिडिटी होने पर आप इसका इस्‍तेमाल कर तुरंत राहत पा सकें।
 




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